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प्रबन्धक की कलम से

असीम हर्ष एवं आनन्द का विषय है कि इस ग्रामीण अंचल में उच्च शिक्षा के प्रसार के पवित्र संकल्प की पूर्णता हेतु विद्या मंदिर के रूप में यह महाविद्यालय मूर्ति रूप ले रहा है। यह संस्था पूर्णतः असम्प्रदायिक एवं धर्म निरपेक्ष तथा इसके द्वार जातीय रंग धर्म आदि पर आधारित किसी प्रकार के भेद-भाव के बिना समस्त जान पिपासुओं के लिए खुले हैं।

इस महाविद्यालय की स्थापना के मूल में हमारा प्रयास निहित है कि वर्तमान में राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय परिदृश्य में तीव्रगति से भौतिक संसाधनों के विकास हेतु स्पर्धा जारी है। इन परिस्थितियों में ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्र के छात्र/छात्राओं की भीड़ उच्च शिक्षा के उच्च स्तरीय मापदण्डों की कसौटी पर खरा उतरना होगा तभी इस समग्र सामाजिक एवं राष्ट्रीय उत्थान का लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।

इस दिशा में व्यक्तित्व विकास का पहलू भी समान रूप से विचारणीय है। हमारा प्रयास होगा कि इस महाविद्यालय में शिक्षा के सम्पूर्ण रूप को बढ़ाने का भागीरथ प्रयास किया जाये जिसके अन्तर्गत नैतिक, चारित्रिक व शिक्षा के मानवीय पहलुओं का भी समावेश अन्र्तनिहित है।

इस सम्पूर्ण शिक्षा प्रक्रिया में हमारा प्रयास होगा कि हम प्रसिद्ध शिक्षाविदों, गुरुजनों प्रबुद्ध वर्ग, समाजशास्त्रियों, पथ प्रदर्शकों व क्षेत्रीय विद्वानों का अमूल्य सहयोग व उनकी वैचारिक ऊर्जा प्राप्त कर इस शैक्षिक अनुष्ठान की पूर्ति हेतु सतत् प्रयन्तशील रहेंगे। महाविद्यालय में विषयबद्ध शिक्षा के साथ ऐसे सेमिनार, गोष्ठियाँ, प्रतियोगितायें व व्यक्ति के सर्वांगीण विकास हेतु ऐसे सभी उदगम किये जायेंगे जो छात्रों के सम्पूर्ण बौद्धिक व कौशल विकास हेतु अभीष्ठ होंगे।

आप सबके सहयोग एवं आशीर्वाद का आकांक्षी।

आपका अपना
हरिश्चन्द्र तिवारी
प्रबन्धक